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Banke Bihari Temple
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Banke Bihari Temple

Vrindavan, Uttar Pradesh|♙   Lord Krishna (Banke Bihari)

4.5(0)

बाँके बिहारी मंदिरबाँके बिहारी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित वृंदावन में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "बाँके बिहारी" को समर्पित है। "बाँके बिहारी" नाम का अर्थ है त्रिभंग मुद्रा (तीन स्थानों से मुड़ी हुई मनमोहक मुद्रा) में खड़े भगवान श्रीकृष्ण, जो अपनी दिव्य सुंदरता, मधुर मुस्कान और आकर्षक स्वरूप से भक्तों का मन मोह लेते हैं। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1864 में महान संत, कृष्ण भक्त एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी ने की थी। मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति, साधना और मधुर भजन-कीर्तन से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने निधिवन में श्री बाँके बिहारी के दिव्य विग्रह के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। बाद में उसी दिव्य विग्रह को वर्तमान मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया। बाँके बिहारी मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी दर्शन व्यवस्था है। यहाँ भगवान के सामने लगा पर्दा (झांकी) कुछ-कुछ क्षणों के अंतराल पर बार-बार खोला और बंद किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री बाँके बिहारी की मनमोहक और करुणामयी दृष्टि इतनी प्रभावशाली है कि यदि भक्त लगातार उनके दर्शन करें तो वे भगवान की दिव्य लीला में पूरी तरह तल्लीन हो सकते हैं। इसी कारण यह विशेष परंपरा सदियों से आज भी निभाई जा रही है। प्रतिदिन भगवान बाँके बिहारी का अत्यंत भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्हें सुंदर एवं आकर्षक वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण तथा ताजे पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विभिन्न प्रकार की सेवाएँ, आरतियाँ और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यह मंदिर विशेष रूप से होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, झूलन उत्सव, राधाष्टमी और शरद पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अत्यंत भव्य रूप धारण कर लेता है। विशेषकर फूलों की होली यहाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान पर रंगों के साथ-साथ सुगंधित पुष्पों की वर्षा की जाती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर भक्ति, संगीत और उत्साह के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लेते हैं। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए वृंदावन पहुँचते हैं। मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियाँ फूलों, प्रसाद, मिठाइयों, पूजा सामग्री और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की दुकानों से सजी रहती हैं, जो वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी जीवंत बनाती हैं। आज बाँके बिहारी मंदिर ब्रज क्षेत्र की भक्ति परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य केंद्र है। यह मंदिर न केवल भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और सनातन परंपरा का भी एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।

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Today’s Darshan

05:45 AM - 06:15 AMOpen Now

Mangala Aarti

3:00 AMDaily

Best Time to Visit

Oct – MarPleasant Weather

Avg. Visit Duration

1 – 2 HoursApprox.

About Banke Bihari Temple

बाँके बिहारी मंदिर

बाँके बिहारी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित वृंदावन में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "बाँके बिहारी" को समर्पित है। "बाँके बिहारी" नाम का अर्थ है त्रिभंग मुद्रा (तीन स्थानों से मुड़ी हुई मनमोहक मुद्रा) में खड़े भगवान श्रीकृष्ण, जो अपनी दिव्य सुंदरता, मधुर मुस्कान और आकर्षक स्वरूप से भक्तों का मन मोह लेते हैं।

इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1864 में महान संत, कृष्ण भक्त एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी ने की थी। मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति, साधना और मधुर भजन-कीर्तन से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने निधिवन में श्री बाँके बिहारी के दिव्य विग्रह के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। बाद में उसी दिव्य विग्रह को वर्तमान मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया।

बाँके बिहारी मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी दर्शन व्यवस्था है। यहाँ भगवान के सामने लगा पर्दा (झांकी) कुछ-कुछ क्षणों के अंतराल पर बार-बार खोला और बंद किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री बाँके बिहारी की मनमोहक और करुणामयी दृष्टि इतनी प्रभावशाली है कि यदि भक्त लगातार उनके दर्शन करें तो वे भगवान की दिव्य लीला में पूरी तरह तल्लीन हो सकते हैं। इसी कारण यह विशेष परंपरा सदियों से आज भी निभाई जा रही है।

प्रतिदिन भगवान बाँके बिहारी का अत्यंत भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्हें सुंदर एवं आकर्षक वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण तथा ताजे पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विभिन्न प्रकार की सेवाएँ, आरतियाँ और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

यह मंदिर विशेष रूप से होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, झूलन उत्सव, राधाष्टमी और शरद पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अत्यंत भव्य रूप धारण कर लेता है। विशेषकर फूलों की होली यहाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान पर रंगों के साथ-साथ सुगंधित पुष्पों की वर्षा की जाती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर भक्ति, संगीत और उत्साह के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लेते हैं।

हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए वृंदावन पहुँचते हैं। मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियाँ फूलों, प्रसाद, मिठाइयों, पूजा सामग्री और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की दुकानों से सजी रहती हैं, जो वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी जीवंत बनाती हैं।

आज बाँके बिहारी मंदिर ब्रज क्षेत्र की भक्ति परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य केंद्र है। यह मंदिर न केवल भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और सनातन परंपरा का भी एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।

Temple Type

Vaishnavite

Festivals

Janmashtami, Holi, Jhulan Yatra

Temple Timings

Mangala Aarti

05:45 AM - 06:15 AM

Shringar Aarti

08:00 AM - 09:00 AM

Rajbhog Aarti

11:00 AM - 12:00 PM

Sandhya Aarti

05:30 PM - 06:00 PM

History

बाँके बिहारी मंदिर

बाँके बिहारी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित वृंदावन में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "बाँके बिहारी" को समर्पित है। "बाँके बिहारी" नाम का अर्थ है त्रिभंग मुद्रा (तीन स्थानों से मुड़ी हुई मनमोहक मुद्रा) में खड़े भगवान श्रीकृष्ण, जो अपनी दिव्य सुंदरता, मधुर मुस्कान और आकर्षक स्वरूप से भक्तों का मन मोह लेते हैं।

इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1864 में महान संत, कृष्ण भक्त एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी ने की थी। मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति, साधना और मधुर भजन-कीर्तन से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने निधिवन में श्री बाँके बिहारी के दिव्य विग्रह के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। बाद में उसी दिव्य विग्रह को वर्तमान मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया।

बाँके बिहारी मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी दर्शन व्यवस्था है। यहाँ भगवान के सामने लगा पर्दा (झांकी) कुछ-कुछ क्षणों के अंतराल पर बार-बार खोला और बंद किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री बाँके बिहारी की मनमोहक और करुणामयी दृष्टि इतनी प्रभावशाली है कि यदि भक्त लगातार उनके दर्शन करें तो वे भगवान की दिव्य लीला में पूरी तरह तल्लीन हो सकते हैं। इसी कारण यह विशेष परंपरा सदियों से आज भी निभाई जा रही है।

प्रतिदिन भगवान बाँके बिहारी का अत्यंत भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्हें सुंदर एवं आकर्षक वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण तथा ताजे पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विभिन्न प्रकार की सेवाएँ, आरतियाँ और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

यह मंदिर विशेष रूप से होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, झूलन उत्सव, राधाष्टमी और शरद पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अत्यंत भव्य रूप धारण कर लेता है। विशेषकर फूलों की होली यहाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान पर रंगों के साथ-साथ सुगंधित पुष्पों की वर्षा की जाती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर भक्ति, संगीत और उत्साह के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लेते हैं।

हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए वृंदावन पहुँचते हैं। मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियाँ फूलों, प्रसाद, मिठाइयों, पूजा सामग्री और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की दुकानों से सजी रहती हैं, जो वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी जीवंत बनाती हैं।

आज बाँके बिहारी मंदिर ब्रज क्षेत्र की भक्ति परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य केंद्र है। यह मंदिर न केवल भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और सनातन परंपरा का भी एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।

Temple Facilities

Free Accommodation

for devotees

Free Meals

(Annaprasadam)

Cloak Room

Facility

Laddu Prasadam

Sales

Drinking Water

Available

Wheelchair

Facility

Medical

Services

Security

24/7

How to Reach

Directions will be updated soon.

Banke Bihari Temple location

Devotee Reviews

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4.5

Based on 0 reviews

59.8K
42.1K
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180
Ramesh Kumar

Ramesh Kumar

May 15, 2025

Very peaceful and divine experience. The arrangements were excellent.

Priya Sharma

Priya Sharma

May 10, 2025

Darshan was smooth and well organized. A memorable spiritual visit!

Anil Verma

Anil Verma

May 06, 2025

A spiritual journey like no other. Will visit again.

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